अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला : जरूर पढ़़े

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 



पिछले 70 साल से कानूनी लड़ाई में फसे देश के चर्चित अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने अपने फैसले में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ किया है और निर्देश में केंद्र सरकार को यह कहा गया है की मस्जिद के निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि अयोध्या में उपलब्ध कराएं। इसके अलावा 4 महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना कर विवादित राम जन्मभूमि स्थल को मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंप दें। इसके अलावा अपने निर्देश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा की मस्जिद का निर्माण किसी प्रतिष्ठित जगह पर होना चाहिए। 


निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज-


अयोध्या भूमि विवाद को लेकर दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्मोही अखाड़े के दावे को भी खारिज किया गया है सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित भूमि को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को तर्कपूर्ण बताते हुए कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा रामलला मूर्ति का उपासक नहीं है निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंध है।


सर्वसम्मति से सुनाया गया ऐतिहासिक फैसला-


लंबे समय से राजनीतिक रूप से गर्म रहे अयोध्या केश विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़ ,अशोक भूषण और अब्दुल नजीर की संविधान पीठ में 40 दिन की सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था जिसे आज सुनाया गया।


 


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